धर्म और उनके अनुयायियों के लक्षण
चित्तरंजन चव्हाण
हर धर्म के अनुयायियों के कुछ विशेष लक्षण होते हैं, उनकी अलग-अलग मान्यताएं होती हैं और अलग अलग रीतिरिवाज होते हैं. लेकिन सभी धर्मों के अनुयायियों के कुछ समान लक्षण भी होते हैं! इसा लेख मेँ मैं इन समान लक्षणों के बारे में लिखा रहा हूं.
● हर धर्म के अनुयायी अपने अपने धर्म को महान मानते हैं और धर्मों दूसरे को निचा दिखने की कोशिश करते हैं.
● हर धर्म के संप्रदाय होते है. हर सम्प्रदाय के अनुयायी होते है. यह अनुयायी अपने ही धर्म के दूसरे सम्प्रदायों का द्वेष करते हैं. (जैसे कॅथोलिक-प्रोटेस्टंट, शिया-सुन्नी, शैव-वैष्णव, दिगंबर-श्वेताम्बर, हीनयान-महायान आदि).
● यह अनुयायी दूसरे धर्मो और संप्रदायों के अनुयायियों के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं, जैसे कि........ (आप अच्छी तरह जानते हैं!).
● हर धर्म के कुछ पवित्र ग्रंथ होते है. अनुयायी मानते हैं की इन ग्रंथों में लिखा हुआ हर वाक्य और हर शब्द 'सत्य' है. वह भी उन ग्रंथों को बिना पढ़े!
● हर धर्म के अनुयायी मानते हैं की उनका धर्म विज्ञान के अनुसार है. भले ही यह अनुयायी विज्ञान क्या है और उनका धर्म क्या है इन दोनों बातों से अपरिचित होते हैं. धार्मिक लोग विज्ञान के सभी फायदे लेते हैं, लेकिन उनकी मानसिकता विज्ञान विरोधी होती है.
● सभी भारतीय धर्मों के अनुयायी अपने-अपने धर्मों को और संप्रदायों को सबसे प्राचीन मानते हैं.
● किसी भी धर्म के लगभग सभी अनुयायियों को उनके धर्म के बेसिक दर्शन (फिलॉसॉफी) की बिलकुल जानकारी नहीं होती है. रीतिरिवाज, कर्मकांड, आदि को ही वह धर्म मानते हैं.
● लगभग सभी अनुयायीयों का धर्म उनके मां-बाप का ही धर्म होता है, ना की अपनी पसंद के अनुसार चुना हुआ धर्म होता है. इस कारण धर्म धर्म न होकर जातियां बन गए हैं!
● सभी धर्मो में कुछ लोग कट्टरतावादी होते है, जो दूसरे धर्मों और संप्रदायों के विरोध में द्वेष फैलाने का काम करते हैं. यह कट्टरतावादी ज्यादातर लोअर मिडल क्लास से होते हैं, या राजनितिक पार्टी से संबधित होते हैं.
● यह कट्टरतावादी कम IQ वाले, बेकार या किसी व्यक्तिगत या पारिवारिक समस्या से पीडित होते हैं.
हमें इस बात को हमेशा याद रखना चाहिए कि मानव का विकास धार्मिक लोगों ने नहीं, बल्कि वैज्ञानिकों, खोजकर्ताओं, दार्शनिकों और व्यवसायीयों ने किया है, न कि धार्मिक लोगों ने किया है.
इसके उलटे मानव को बांटने का काम धार्मिक लोगों ने किया हैं. धर्म के नाम पर बडे बडे युद्ध, नरसंहार, बलात्कार, अत्याचार, भेदभाव, खून-खराबा आदि हो गए और आज भी यही काम हो रहा है.
कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि मजहब ही सिखाता है आपस में बैर रखना!
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